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CGPSC भर्ती विवाद में नया मोड़: विशेष लोक अदालत पहुंचा मामला, याचिकाकर्ता ने कहा- समझौता नहीं

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CGPSC भर्ती विवाद में नया मोड़: विशेष लोक अदालत पहुंचा मामला, याचिकाकर्ता ने कहा- समझौता नहीं

May 12, 2026 Source: Bharat Vaani

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित CGPSC 2003 भर्ती घोटाले में एक बार फिर नया मोड़ सामने आया है। इस मामले की मुख्य याचिकाकर्ता वर्षा डोंगरे सहित अन्य पक्षकारों को सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयोजित विशेष लोक अदालत में उपस्थित होने के लिए बुलाया गया है। हालांकि वर्षा डोंगरे ने साफ कर दिया है कि इस मामले में किसी भी प्रकार के समझौते की कोई संभावना नहीं है और अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट से ही होना चाहिए। यह मामला वर्ष 2003 की छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे। वर्षा डोंगरे ने वर्ष 2006 में हाईकोर्ट में याचिका दायर कर भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद वर्ष 2017 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अपने फैसले में चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी और अंकों की हेराफेरी को सही माना था। कोर्ट ने राज्य सरकार को पूरी चयन सूची संशोधित कर नई सूची जारी करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ चंदन त्रिपाठी समेत कई चयनित अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया में अपील दायर की थी। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद से मामला लंबित है। अब सुप्रीम कोर्ट की विशेष लोक अदालत के माध्यम से विवाद को आपसी सहमति से सुलझाने की पहल की गई है। इसके तहत वर्षा डोंगरे, राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों में उपस्थित होने के लिए नोटिस जारी किए गए हैं। मामले की जांच में एसीबी रिपोर्ट और हाईकोर्ट के फैसले में कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया था। आरोप था कि कई अपात्र उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाने के लिए उत्तर पुस्तिकाओं में अंकों से छेड़छाड़ की गई। रिपोर्ट के अनुसार 52 ऐसे उम्मीदवारों का चयन हुआ जो इंटरव्यू के लिए पात्र ही नहीं थे, जबकि 17 योग्य उम्मीदवार चयन से बाहर रह गए थे। यदि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार दोबारा मेरिट सूची जारी होती, तो कई अधिकारियों की नियुक्तियां प्रभावित हो सकती थीं। इनमें कुछ अधिकारी बाद में आईएएस पद तक पहुंच चुके हैं। यही कारण है कि यह मामला लंबे समय से राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।