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सरकार की अधिसूचना पर रोक, आशा वर्करों को चुनाव लड़ने की राहत

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सरकार की अधिसूचना पर रोक, आशा वर्करों को चुनाव लड़ने की राहत

May 10, 2026 Source: Bharat Vaani

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पंचायत और नगर निकाय चुनावों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में आशा वर्कर्स को बड़ी राहत प्रदान की है। अदालत ने राज्य सरकार की 2 मई 2026 को जारी उस अधिसूचना पर रोक लगा दी है, जिसमें आशा वर्कर्स को पार्ट-टाइम और मानदेय आधारित कर्मचारी मानते हुए पंचायत एवं नगर निकाय चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया था। यह मामला Himachal Pradesh High Court में दायर याचिकाओं से जुड़ा है, जिसमें कुल सात याचिकाकर्ताओं ने सरकार के इस फैसले को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि आशा वर्कर्स वास्तव में सरकारी कर्मचारी नहीं हैं, बल्कि वे स्वयंसेवी आधार पर काम करती हैं और उन्हें वेतन के बजाय केवल प्रोत्साहन राशि (मानदेय) दी जाती है। ऐसे में उन्हें सरकारी कर्मचारी मानकर चुनाव लड़ने से रोकना गलत है। इस मामले की सुनवाई Justice Vivek Singh Thakur और Justice Ranjan Sharma की खंडपीठ ने की। अदालत ने प्रारंभिक रूप से याचिकाकर्ताओं के पक्ष को मजबूत मानते हुए सरकार की अधिसूचना पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया आशा वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी नहीं माना जा सकता, इसलिए उनके चुनाव लड़ने के अधिकार पर प्रतिबंध उचित नहीं है। सरकार की ओर से 2 मई 2026 को जारी अधिसूचना में यह स्पष्ट किया गया था कि आशा वर्कर्स को पार्ट-टाइम कर्मचारी मानते हुए उन्हें पंचायती राज और नगर निकाय चुनावों में भाग लेने के लिए अयोग्य माना जाएगा। लेकिन इस निर्णय के खिलाफ दायर याचिकाओं में यह भी कहा गया कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार आशा वर्कर्स केवल मानदेय प्राप्त करने वाली स्वयंसेवक हैं, न कि नियमित सरकारी कर्मचारी। अदालत के इस फैसले के बाद राज्य में चल रही पंचायत और नगर निकाय चुनाव प्रक्रिया पर भी असर पड़ा है। अब आशा वर्कर्स को स्थानीय निकाय चुनावों में भाग लेने का अधिकार मिल गया है, जिससे उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी का अवसर प्राप्त होगा। मामले की अगली सुनवाई 1 जून 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें इस विषय पर विस्तृत विचार किया जाएगा और अंतिम निर्णय की दिशा तय हो सकती है।