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अब मिसाइल नहीं, भारत की नई ड्रोन फोर्स बनेगी दुश्मनों का सबसे बड़ा खतरा

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अब मिसाइल नहीं, भारत की नई ड्रोन फोर्स बनेगी दुश्मनों का सबसे बड़ा खतरा

May 7, 2026 Source: Bharat Vaani

भारत ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर अपनी नई रक्षा रणनीति और सैन्य ताकत का बड़ा खाका पेश किया है। पिछले साल 6 से 10 मई के बीच चले 88 घंटे लंबे इस अभियान ने भारत की युद्ध क्षमता और आधुनिक तकनीक आधारित सैन्य तैयारी को दुनिया के सामने दिखाया। इस ऑपरेशन के बाद भारतीय रक्षा तंत्र ने भविष्य के युद्धों को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब पारंपरिक मिसाइलों के साथ-साथ ड्रोन आधारित युद्ध प्रणाली को प्राथमिकता दी जा रही है। भारतीय रक्षा मुख्यालय ने 50 हजार जवानों की एक विशेष ‘ड्रोन फोर्स’ तैयार करने का फैसला किया है। यह फोर्स किसी भी सैन्य कार्रवाई में सबसे पहले जवाबी हमला करने के लिए तैनात होगी। सेना अगले तीन वर्षों में 15 नए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करेगी, जहां सैनिकों को वर्चुअल रियलिटी और सिम्युलेटर के जरिए आधुनिक युद्ध प्रशिक्षण दिया जाएगा। भविष्य में बीएसएफ और आईटीबीपी जैसे सुरक्षा बलों को भी इस नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। सेना की योजना है कि हर कोर में हजारों ड्रोन शामिल हों और हर सैनिक के पास अपना व्यक्तिगत ड्रोन उपलब्ध हो। इस दौरान भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी बड़ी प्रगति की है। देश का रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। ब्रह्मोस मिसाइल में स्वदेशी तकनीक की हिस्सेदारी 72 प्रतिशत तक बढ़ गई है। अब इसके इंजन और सीकर्स जैसी महत्वपूर्ण तकनीकें भारतीय कंपनियां तैयार कर रही हैं। इसके अलावा एआई, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षेत्र में कई नए डिफेंस स्टार्टअप भी उभरे हैं। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले युद्ध केवल जमीन या हवा तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि साइबर, अंतरिक्ष और समुद्री क्षेत्रों तक फैलेंगे। इसी वजह से भारत अपनी एंटी-ड्रोन क्षमता और इलेक्ट्रॉनिक व साइबर सुरक्षा को मजबूत कर रहा है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान और पीओके में कई आतंकी ठिकानों को नष्ट किया था। जवाबी हमलों के बावजूद भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश दुश्मन ड्रोन को मार गिराया और पाकिस्तान के कई एयरबेस व रक्षा सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचाया। लगातार सैन्य दबाव के बाद पाकिस्तान ने युद्ध रोकने की अपील की थी, जिसे भारत ने अपनी रणनीतिक और सैन्य सफलता माना।