Sunday, May 24, 2026
English edition

Politics

ऐतिहासिक मोड़: देश में लेफ्ट राजनीति पर गहराया संकट

May 4, 2026 Source: Bharat Vaani

ऐतिहासिक मोड़: देश में लेफ्ट राजनीति पर गहराया संकट
दिए गए लेख के अनुसार केरल विधानसभा चुनाव की मतगणना के दौरान राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। रुझानों में कांग्रेस नेतृत्व वाला यूडीएफ (UDF) गठबंधन बढ़त बनाता दिख रहा है, जबकि वामपंथी गठबंधन एलडीएफ (LDF) पिछड़ता हुआ नजर आ रहा है। कुल 140 सीटों के रुझानों में यूडीएफ लगभग 95 सीटों पर आगे बताया जा रहा है, जबकि एलडीएफ करीब 39 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी (BJP) कुछ सीटों पर बढ़त में दिखाई दे रही है और अन्य उम्मीदवार भी कुछ क्षेत्रों में आगे बताए जा रहे हैं। लेख में यह दावा किया गया है कि यदि ये रुझान अंतिम परिणामों में बदलते हैं, तो केरल में लंबे समय बाद वामपंथी सरकार सत्ता से बाहर हो सकती है। इसे एक ऐतिहासिक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि केरल को देश में वामपंथ का अंतिम प्रमुख गढ़ माना जाता रहा है। इसके साथ ही लेख में यह भी कहा गया है कि भारत में वामपंथी राजनीति का प्रभाव पिछले कुछ वर्षों में लगातार कम हुआ है। पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि वहां पहले वामपंथी सरकारें थीं, लेकिन समय के साथ वे सत्ता से बाहर हो गईं। पश्चिम बंगाल में 2011 के बाद वाम मोर्चे की वापसी नहीं हो सकी, जबकि त्रिपुरा में 2018 के बाद वामपंथी सरकार समाप्त हो गई। केरल चुनाव के संदर्भ में यह भी उल्लेख किया गया है कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन सहित कई वरिष्ठ मंत्री अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में पीछे चल रहे हैं। इसमें कई मंत्रियों के नाम भी दिए गए हैं जो कथित रूप से अपने क्षेत्रों में बढ़त बनाए रखने में संघर्ष कर रहे हैं। यह स्थिति वामपंथी खेमे के लिए चिंता का कारण बताई गई है। लेख में आगे दावा किया गया है कि चुनाव परिणामों से पहले ही राजनीतिक संकेत देखने को मिले, जैसे मुख्यमंत्री पिनराई विजयन द्वारा अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल से “मुख्यमंत्री” शब्द हटाना। इसे विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषकों द्वारा संभावित हार के संकेत के रूप में देखा गया। कुल मिलाकर, लेख के अनुसार यह चुनाव वामपंथी राजनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है, जहां केरल में भी उनकी सत्ता खतरे में दिखाई दे रही है और देश में उनके प्रभाव में और गिरावट की संभावना जताई गई है।