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भारतीय पेट्रोल दामों की पाकिस्तान मंत्री ने की खुलकर तारीफ

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भारतीय पेट्रोल दामों की पाकिस्तान मंत्री ने की खुलकर तारीफ

May 1, 2026 Source: Bharat Vaani

भारत और पाकिस्तान के बीच पेट्रोलियम स्थिति को लेकर हाल ही में एक दिलचस्प तुलना सामने आई है, जिसमें पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज़ मलिक ने भारत की ऊर्जा नीतियों की खुलेआम सराहना की। वैश्विक स्तर पर इज़राइल-अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति बाधित हुई, जिसका असर दुनिया भर के देशों पर पड़ा। इस संकट के बीच भारत ने अपेक्षाकृत स्थिर स्थिति बनाए रखी, जबकि पाकिस्तान को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा। मलिक के अनुसार, भारत की मजबूती का मुख्य कारण उसके बड़े विदेशी मुद्रा भंडार और रणनीतिक तेल भंडार हैं। भारत के पास लगभग 600 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है, जो उसे वैश्विक संकटों से निपटने की वित्तीय क्षमता देता है। साथ ही, भारत अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के किसी कार्यक्रम का हिस्सा नहीं है, जिससे उसे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौरान टैक्स घटाने जैसे फैसले लेने की स्वतंत्रता मिलती है। इसके विपरीत, पाकिस्तान IMF के सख्त नियमों और शर्तों से बंधा हुआ है। बढ़ती तेल कीमतों के चलते पाकिस्तान को अपने नागरिकों को राहत देने के लिए IMF से बातचीत करनी पड़ी। सरकार ने डीज़ल पर लेवी को घटाकर शून्य कर दिया और पेट्रोल पर अतिरिक्त बोझ डाला, जबकि मोटरसाइकिल चालकों को लक्षित सब्सिडी दी गई। IMF से बातचीत के बाद पाकिस्तान को पेट्रोल पर 80 रुपये प्रति लीटर तक लेवी घटाने की अनुमति मिली, जिससे कीमत घटकर 378 रुपये प्रति लीटर हो गई। हालांकि, पाकिस्तान में यह राहत अस्थायी मानी जा रही है, क्योंकि देश के पास रणनीतिक तेल भंडार नहीं है। मलिक ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान के पास केवल 5–7 दिनों का कच्चा तेल भंडार है और रिफाइंड उत्पाद अधिकतम 20–21 दिनों तक ही चल सकते हैं। इसके मुकाबले भारत के पास 60–70 दिनों का तेल भंडार है, जिसे जरूरत पड़ने पर तुरंत उपयोग में लाया जा सकता है। भारत सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में लगभग 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती करके कीमतों को नियंत्रित रखा है। साथ ही, विभिन्न देशों से कच्चा तेल आयात कर और रणनीतिक भंडार का उपयोग करके भारत ने वैश्विक तेल संकट के प्रभाव को काफी हद तक कम कर दिया है। कुल मिलाकर, यह तुलना दिखाती है कि मजबूत आर्थिक आधार, रणनीतिक योजना और नीतिगत लचीलापन किसी भी देश को वैश्विक संकट के समय स्थिर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।