Monday, October 12, 2026
English edition
समान नागरिक संहिता को लेकर छत्तीसगढ़ में तेज हुआ जनसंवाद, आदिवासी समाज ने दिए सुझाव

India

समान नागरिक संहिता को लेकर छत्तीसगढ़ में तेज हुआ जनसंवाद, आदिवासी समाज ने दिए सुझाव

September 1, 2026 Source: Bharat Vaani

​रायपुर, 01 सितंबर 2026/ छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) का सर्वसमावेशी प्रारूप तैयार करने की दिशा में प्रक्रिया तेज हो गई है। राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में आज यूसीसी समिति के समक्ष बस्तर से लेकर सरगुजा तक के प्रतिनिधियों की आवाज गूंजी। इस परिचर्चा में सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष और प्रतिनिधियों, अध्यक्ष राज्य महिला आयोग और अध्यक्ष राज्य फिल्म विकास निगम ने विवाह, तलाक, भरण-पोषण और उत्तराधिकार जैसे संवेदनशील विषयों पर अपने महत्वपूर्ण सुझाव रखे। समिति के सदस्यों सेवानिवृत्त आईएएस श्री एम. के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार, सेवानिवृत्त श्रीमती ज्योति रानी सिंह और सदस्य सचिव श्याम धावड़े ने सभी सुझावों को ध्यानपूर्वक सुना और आश्वस्त किया कि राज्य की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक ताने-बाने का पूरा ध्यान रखा जाएगा। ​ इस दौरान कंवर, गोंड, बैगा और उरांव जैसी प्रमुख जनजातियों के प्रतिनिधियों ने अपनी बात रखते हुए आदिवासियों की सदियों पुरानी रूढ़िगत प्रथाओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विशिष्टता को नए कानून में पूर्ण संरक्षण देने की बात कही। इसके साथ ही विवाह पंजीयन, संपत्ति के अधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे व्यावहारिक मुद्दों पर भी समिति के साथ गंभीर विचार-विमर्श हुआ। ​महिला अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा के मुद्दे पर चर्चा करते हुए राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू ने जनजातीय परंपराओं के संरक्षण के साथ-साथ सकारात्मक सामाजिक बदलावों का समर्थन किया। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के भरण-पोषण के अधिकार, राष्ट्रीय एकता को मजबूती देने और धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने के संदर्भ में यूसीसी की आवश्यकता को रेखांकित किया। वहीं, राज्य फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-कला और जनजातीय धरोहर को अक्षुण्ण रखने का सुझाव देते हुए कहा कि वैवाहिक और संपत्ति अधिकारों में समानता से समाज के अंतिम छोर पर खड़ी महिलाओं को नया आत्मविश्वास और कानूनी सुरक्षा मिलेगी। ​संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत समिति प्रदेशभर में व्यापक जन-संवाद चला रही है। प्रस्तावित संहिता का मूल उद्देश्य धर्म या समुदाय के भेदभाव से परे हटकर सभी नागरिकों के लिए एक समान विधिक ढांचा तैयार करना है। इसके तहत विवाह एवं तलाक,भरण - पोषण,उत्तराधिकार एवं विरासत तथा लिव इन संबंध में विचार और सुझावों पर समिति मंथन करेगी। वर्तमान में समिति जिला स्तरीय फील्ड स्टडी, ऑनलाइन पोर्टल और प्रत्यक्ष बैठकों के माध्यम से आम जनता, कानूनविदों और सामाजिक संगठनों की राय जुटा रही है, ताकि छत्तीसगढ़ में एक पारदर्शी, न्यायसंगत और जन-हितैषी समान नागरिक संहिता लागू की जा सके।