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सिंधु जल संधि पर भारत के फैसले का असर; सिंध और बलूचिस्तान में गहराया पानी का संकट, पाकिस्तान का बड़ा हिस्सा प्रभावित...

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सिंधु जल संधि पर भारत के फैसले का असर; सिंध और बलूचिस्तान में गहराया पानी का संकट, पाकिस्तान का बड़ा हिस्सा प्रभावित...

June 13, 2026 Source: Bharat Vaani

नई दिल्ली। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार द्वारा सिंधु जल संधि को ठंडे बस्ते में डालने के फैसले के बाद पाकिस्तान में पानी का संकट लगातार गहराता जा रहा है। इसका सबसे अधिक असर सिंध और बलूचिस्तान के कई इलाकों में देखने को मिल रहा है, जहां खेती, लोगों की आजीविका और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची वाले सिंध प्रांत में पानी की कमी को लेकर चिंता बढ़ गई है। ‘डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार, सिंधु नदी पर बने महत्वपूर्ण सुक्कुर बैराज से जुड़े नहर तंत्र में भारी जल संकट पैदा हो गया है। नॉर्थ वेस्टर्न कैनाल में 64.1 प्रतिशत, राइस कैनाल में 38 प्रतिशत और दादू कैनाल में 82 प्रतिशत तक पानी की कमी दर्ज की गई है। सिंध के सिंचाई विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पंजाब और टौंसा बैराज अपने निर्धारित हिस्से से अधिक पानी का उपयोग कर रहे हैं, जबकि निचले इलाकों में पानी की उपलब्धता लगातार घट रही है। इस असमान वितरण को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गए हैं। जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख हाफिज नईम-उर-रहमान ने सिंध सरकार को कराची की जल समस्या के लिए जिम्मेदार ठहराया है, जबकि पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने संघीय अधिकारियों पर सिंध के साथ भेदभाव का आरोप लगाया है। जल संकट का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ा है। कई नहरों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंचने के कारण धान की नर्सरी और खरीफ फसलों की तैयारी प्रभावित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो पाकिस्तान के कृषि उत्पादन और अर्थव्यवस्था पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।