Thursday, October 15, 2026
English edition
आम आदमी को बड़ा झटका? 2 हफ्तों में 7 रुपये बढ़े दाम, आगे क्या होगा?

India

आम आदमी को बड़ा झटका? 2 हफ्तों में 7 रुपये बढ़े दाम, आगे क्या होगा?

May 30, 2026 Source: Bharat Vaani

नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बदलाव के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में फिलहाल कोई नया संशोधन नहीं किया गया है। 30 मई को सरकारी तेल कंपनियों ने ईंधन के दामों को यथावत रखा, जिससे आम लोगों को कुछ राहत मिली है। हालांकि पिछले दो सप्ताह के दौरान पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कई बार बढ़ोतरी हो चुकी है, जिसके कारण उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा है। देश के प्रमुख महानगरों में आज पेट्रोल और डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर बिक रहा है। वहीं मुंबई में पेट्रोल 111.18 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर के स्तर पर कायम है। कोलकाता में पेट्रोल 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जबकि बेंगलुरु में पेट्रोल की कीमत 110.89 रुपये प्रति लीटर बनी हुई है। पिछले 15 दिनों का आंकड़ा देखें तो ईंधन की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। 15 मई से तेल कंपनियों ने लगभग दो वर्षों के अंतराल के बाद कीमतों में संशोधन की प्रक्रिया फिर शुरू की थी। इसके बाद चार अलग-अलग चरणों में पेट्रोल और डीजल के दामों में कुल मिलाकर करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हुई। इस बढ़ोतरी का असर सीधे आम उपभोक्ताओं और परिवहन क्षेत्र पर पड़ा है। इसी बीच वैश्विक बाजार से राहत भरी खबर सामने आई है। अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। ताजा कारोबारी सत्र में क्रूड ऑयल की कीमत लगभग 1.28 प्रतिशत घटकर 87.76 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में यह नरमी बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में भारतीय बाजार में भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों में राहत मिल सकती है। हालांकि तेल की कीमतें कई वैश्विक और घरेलू कारकों पर निर्भर करती हैं, इसलिए फिलहाल किसी तत्काल कटौती की घोषणा नहीं की गई है। फिर भी कच्चे तेल की मौजूदा गिरावट ने उपभोक्ताओं और उद्योग जगत दोनों के लिए उम्मीद की नई किरण जरूर पैदा की है। अब सभी की नजरें अंतरराष्ट्रीय बाजार की गतिविधियों और तेल कंपनियों के अगले फैसले पर टिकी हुई हैं।