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8वें वेतन आयोग पर बड़ा अपडेट, सभी मांगें मानने के मूड में नहीं सरकार

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8वें वेतन आयोग पर बड़ा अपडेट, सभी मांगें मानने के मूड में नहीं सरकार

May 26, 2026 Source: Bharat Vaani

देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की नजरें इस समय 8वें वेतन आयोग पर टिकी हुई हैं। आयोग के गठन के बाद से कर्मचारी संगठनों ने वेतन, भत्तों और पेंशन में बड़े सुधार की मांग तेज कर दी है। हालांकि अब संकेत मिल रहे हैं कि सरकार सभी मांगों को मानने के पक्ष में नहीं है। बढ़ते राजकोषीय दबाव और आर्थिक चुनौतियों के कारण सरकार संतुलित फैसला लेने की तैयारी में है। कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी मांग 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू करने की है। फिटमेंट फैक्टर बढ़ने से कर्मचारियों के बेसिक वेतन, पेंशन और भत्तों में बड़ा इजाफा हो सकता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी बढ़ोतरी से केंद्र सरकार के खजाने पर भारी बोझ पड़ेगा। इसका असर राज्य सरकारों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि केंद्र के बाद राज्य भी आमतौर पर अपने कर्मचारियों के वेतन में बढ़ोतरी करते हैं। इसी वजह से सरकार इस मांग पर पूरी तरह सहमत नहीं दिख रही है और बीच का रास्ता तलाश सकती है। पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली भी सबसे विवादित मुद्दों में शामिल है। कर्मचारी संगठन OPS को फिर से लागू करने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि इसमें रिटायरमेंट के बाद निश्चित पेंशन की गारंटी मिलती है। वहीं नई पेंशन योजना (NPS) बाजार आधारित है, जिससे भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रहती है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इतने वर्षों बाद NPS को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं होगा, क्योंकि यह अब देश की वित्तीय व्यवस्था का बड़ा हिस्सा बन चुका है। सरकार ने हाल ही में यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के तहत अपना योगदान बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन लंबे समय तक इसे बनाए रखना भी चुनौती माना जा रहा है। ऐसे में यूनियनें अब OPS जैसी सुरक्षा की मांग पर ज्यादा जोर दे रही हैं। इसके अलावा कर्मचारी संगठन फैमिली यूनिट फॉर्मूले में बदलाव चाहते हैं। वर्तमान में न्यूनतम वेतन तय करने के लिए 3 सदस्यीय परिवार को आधार माना जाता है, जबकि यूनियनों का कहना है कि आज के समय में 5 सदस्यीय परिवार के खर्चों को ध्यान में रखा जाना चाहिए। बढ़ती महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास खर्चों को देखते हुए यह मांग लगातार मजबूत हो रही है। आर्थिक जानकारों का मानना है कि वेतन और पेंशन में अत्यधिक बढ़ोतरी से महंगाई और सरकारी खर्च दोनों बढ़ सकते हैं। इसलिए सरकार ऐसा समाधान तलाश सकती है जो कर्मचारियों को राहत भी दे और अर्थव्यवस्था पर ज्यादा दबाव भी न डाले। इसी बीच 22 और 23 जून को लखनऊ में 8वें वेतन आयोग को लेकर बड़ी बैठक होने वाली है। इसमें विभिन्न कर्मचारी संगठनों और सरकारी संस्थानों के प्रतिनिधियों से चर्चा की जाएगी। माना जा रहा है कि आयोग की सिफारिशों में कर्मचारियों की मांगों के साथ-साथ सरकार की आर्थिक क्षमता को भी बराबर महत्व दिया जाएगा।