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इस्लामाबाद में हंगामा: UAE ने 2000 पाकिस्तानियों को भेजा वापस

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इस्लामाबाद में हंगामा: UAE ने 2000 पाकिस्तानियों को भेजा वापस

May 22, 2026 Source: Bharat Vaani

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के रिश्तों में दरार की खबरों ने इस्लामाबाद की राजनीति में हलचल मचा दी है। पाकिस्तान की संसद में उस समय जोरदार हंगामा देखने को मिला, जब यह दावा किया गया कि यूएई ने करीब 2,000 पाकिस्तानियों को जबरन वापस भेज दिया है। विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया कि इन लोगों के पैसे और सामान भी जब्त कर लिए गए, जिसके बाद सरकार को संसद में सफाई देनी पड़ी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में लगभग 1.64 लाख पाकिस्तानियों को अलग-अलग अरब देशों से निर्वासित किया गया है। इनमें सबसे ज्यादा संख्या सऊदी अरब और यूएई से निकाले गए लोगों की रही। पाकिस्तान सरकार का कहना है कि कई निर्वासितों पर आपराधिक गतिविधियों और भीख मांगने जैसे आरोप थे, जिसके चलते संबंधित देशों ने कार्रवाई की। यूएई में इस समय करीब 20 लाख पाकिस्तानी कामगार रहते हैं, जो हर साल बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा पाकिस्तान भेजते हैं। पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था के लिए यह रकम बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में 2,000 लोगों की वापसी और उनके खिलाफ कथित सख्त कार्रवाई ने पाकिस्तान में चिंता बढ़ा दी है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक संसद में विपक्ष ने शहबाज शरीफ सरकार को घेरते हुए पूछा कि आखिर यूएई के साथ रिश्ते इतने खराब क्यों हुए। इसके बाद सरकार ने मामले की जांच विदेश मामलों की समिति से कराने की घोषणा की। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि हाल के दिनों में यूएई ने पाकिस्तान पर अपना कर्ज जल्द लौटाने का दबाव बनाया था। बाद में पाकिस्तान ने सऊदी अरब की मदद से यह कर्ज चुकाया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूएई की नाराजगी के पीछे दो बड़े कारण हो सकते हैं—पहला, पाकिस्तान का सऊदी अरब के पक्ष में खुलकर समर्थन करना और दूसरा, क्षेत्रीय तनाव के दौरान मध्यस्थता की कोशिशों में यूएई को शामिल न करना। कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि यूएई सुरक्षा कारणों और जासूसी के शक को लेकर पाकिस्तानियों पर कड़ी निगरानी रख रहा है। खासतौर पर पाकिस्तानी शिया समुदाय के लोगों को लेकर सख्त रुख अपनाने की बातें सामने आई हैं। इन घटनाओं ने पाकिस्तान और यूएई के संबंधों को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो इसका असर न केवल दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों पर पड़ेगा बल्कि खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों पाकिस्तानियों के भविष्य पर भी पड़ सकता है।